भारत के कई जिलों में मूंग दाल( moong dal ) की फसल को जल्दी सुखाने के लिए पैराक्वाट डाइक्लोराइड नामक खतरनाक दवा के उपयोग का दावा सामने आया है।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ऐसी मूंग दाल का सेवन फेफड़े, लिवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
देश के कई हिस्सों में मूंग दाल को लेकर चिंता तेज़ हो गई है। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे दावों में कहा जा रहा है कि किसान फसल को जल्दी सुखाने के लिए पैराक्वाट डाइक्लोराइड नामक अत्यंत जहरीली दवा का छिड़काव कर रहे हैं। आरोप है कि यह दवा फसल को 24 घंटे में सूखा देती है, जिससे कटाई में समय और मजदूरी की बचत होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह से तैयार की गई मूंग दाल खाने पर गंभीर स्वास्थ्य खतरे पैदा हो सकते हैं।
मूंग दाल mein क्या है पैराक्वाट डाइक्लोराइड? क्यों है विवाद में?
पैराक्वाट दुनिया के कई देशों में अत्यधिक खतरनाक हार्बीसाइड माना जाता है।
यह खरपतवार को तुरंत नष्ट कर देता है
हवा के साथ फैल सकता है
शरीर में जाने पर फेफड़ों, लिवर और किडनी को नुकसान पहुँचा सकता है
कई देशों में यह बैन है
भारत में यह मार्केट में उपलब्ध है, लेकिन इसके दुरुपयोग को लेकर शिकायतें बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
कुछ डॉक्टरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि पैराक्वाट से सुखाई गई फसल का सेवन होता है, तो यह शरीर में गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
चेतावनी में यह शामिल है—

फेफड़ों में संक्रमण
लिवर व किडनी फेलियर का जोखिम
लंबे समय में कैंसर का खतरा
शरीर में टॉक्सिन्स का जमना
हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं की गई है, लेकिन जांच की मांग तेज़ हो गई है।
किसानों की मजबूरी—मजदूरों की कमी और जल्दी कटाई का दबाव

कई किसान मानते हैं कि मजदूरों की कमी और समय की पाबंदी के कारण वे फसल को जल्द सुखाने के लिए तेज़ रसायनों का सहारा लेने लगे हैं।
लेकिन इससे उपभोक्ता की प्लेट तक पहुंचने वाले खाद्यान्न की सेहत पर सवाल उठने लगे हैं।गाँवों में बढ़ी बेचैनी—हवा से फैलने का डर
कुछ ग्रामीणों का दावा है कि
हवा में उड़कर यह दवा घरों तक पहुंच रही है
लोग सांस की दिक्कत और एलर्जी की शिकायत कर रहे हैं
फसलों, सब्जियों और दूध तक में इसका असर हो सकता है
हालाँकि यह दावा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, पर ग्रामीणों में डर बढ़ गया है।
सरकार क्यों नहीं लगा रही बैन? उठ रहे कई सवाल
लोग यह प्रश्न उठा रहे हैं कि:
इतनी खतरनाक दवा मार्केट में क्यों उपलब्ध है?
फसलों पर इसका छिड़काव कौन मॉनिटर करता है?
क्या खाद्य सामग्री की सैंपलिंग हो रही है?
उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले इसकी जांच कैसे होगी?
इन सवालों पर अभी स्पष्ट सरकारी बयान नहीं आया है।
उपभोक्ताओं में घबराहट—मूंग दाल से बने सभी व्यंजन निशाने पर
मूंग दाल से बनने वाले व्यंजन—
दाल
हलवा
नमकीन
पकोड़े
हरी दाल के अन्य घरेलू व्यंजन
सबके प्रति लोगों में डर बढ़ गया है।
क्या करें उपभोक्ता?
अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने मूंग दाल को लेकर देशव्यापी चेतावनी जारी नहीं की है।
लेकिन विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं:लंबे समय में कैंसर जोखिम
विश्वसनीय स्रोत से ही दाल खरीदें
पैक्ड और प्रमाणित ब्रांड लें
स्थानीय मंडियों से खरीदी दाल को भिगोकर व अच्छी तरह धोकर उपयोग करें
बीजों पर असामान्य तेज़ चमक या बदरंग दानों से बचें
फिलहाल मामला गंभीर है और जांच की मांग लगातार उठ रही है।
यह स्पष्ट है कि फसल को जल्दी तैयार करने की होड़ कहीं न कहीं उपभोक्ताओं की सेहत पर भारी पड़ रही है।सरकार और कृषि विभाग की जिम्मेदारी है कि
रसायनों के उपयोग पर सख्त मॉनिटरिंग करे
फसलों की नियमित जांच सुनिश्चित करे
उपभोक्ताओं को साफ और सुरक्षित खाद्यान्न उपलब्ध कराए
तब तक सतर्क रहना ही सुरक्षित विकल्प है
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