Delhi Blast Case: जांच में नए सुराग, डिजिटल गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियों का फोकस — क्या है अब तक की बड़ी जानकारियाँ?
नई दिल्ली, 2025। दिल्ली में हुए ब्लास्ट मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सुरक्षा एजेंसियों को कई नए तकनीकी और डिजिटल सुराग मिले हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घटना से पहले संदिग्ध व्यक्तियों द्वारा डेटा डिलीट करने और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का उपयोग करने के संकेत मिले हैं। एजेंसियाँ अब इन डिजिटल गतिविधियों को खंगालकर घटना की पूरी साजिश को समझने की कोशिश कर रही हैं।
Delhi blast -डेटा डिलीट करने और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप पर संदेह
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को एजेंसियों ने कब्जे में लिया है, उनमें से कई में डेटा अचानक हटाया हुआ मिला।
कई फोन पूरी तरह रीसेट पाए गए
कुछ डिवाइसों में एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के उपयोग के संकेत मिले
जांचकर्ताओं के अनुसार, इन ऐप्स में नंबर, ईमेल या IP ट्रैकिंग की सुविधा नहीं होती, जिससे जांच जटिल हो जाती है
सूत्र बताते हैं कि एजेंसियाँ अब अंतरराष्ट्रीय सर्वर आधारित मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म से सहायता लेने की संभावनाएँ तलाश रही हैं।
बरामद नोटबुक और कोडेड एंट्री की जांच जारी
जांच टीम को कुछ स्थानों से नोटबुक और दस्तावेज़ मिले हैं जिनमें कोडेड एंट्री, न्यूमेरिकल सीक्वेंस और कुछ संदिग्ध नाम दर्ज बताए जा रहे हैं।
इन एंट्रीज़ का क्या अर्थ है और क्या इनका धमाके से कोई सीधा संबंध है, यह अभी जांच का विषय है।
कई जगहों से पूछताछ और गिरफ्तारी, मेडिकल काउंसिल ने कार्रवाई की
जांच एजेंसियों ने विभिन्न राज्यों में कई संदिग्धों से पूछताछ की है।
इस मामले में सामने आए कुछ डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन नेशनल मेडिकल काउंसिल द्वारा रद्द किए जाने की खबर भी सामने आई।
रजिस्ट्रेशन रद्द होने का अर्थ है कि वे अब चिकित्सा सेवा प्रदान नहीं कर सकेंगे।
सरकारी स्रोतों का कहना है कि यह कार्रवाई “चल रही जांच में प्राप्त इनपुट्स” के आधार पर की गई है।
Delhi blast -मामले से जुड़े कई राज्यों में कार्रवाई
घटना के बाद दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की।
कई ठिकानों पर छापेमारी हुई, जहाँ से कुछ केमिकल पदार्थ, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और व्यक्तिगत दस्तावेज़ बरामद हुए हैं।
जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री की भूमिका “प्राथमिक स्तर पर संदिग्ध” है और फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट निष्कर्ष सम्भव होगा।
अमोनियम नाइट्रेट के इस्तेमाल की जांच
जांच में यह भी संभावना जताई जा रही है कि धमाके में लो-इंटेंसिटी एक्सप्लोसिव, खासकर अमोनियम नाइट्रेट आधारित सामग्री का उपयोग किया गया हो सकता है।
हालाँकि, सुरक्षा मानकों के अनुसार, किस तरह और किन रसायनों का प्रयोग हुआ, इसकी पुष्टि केवल फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही की जाएगी।
Delhi blast case -दिल्ली जैसे संवेदनशील स्थान को क्यों चुना गया?
विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील इलाकों में किसी भी प्रकार की घटना का उद्देश्य केवल नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि दहशत फैलाना भी होता है।
दिल्ली, जहाँ बड़ी संख्या में धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक इमारतें और व्यस्त बाज़ार मौजूद हैं, ऐसे हमलों के लिए खासा संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि “सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली किसी भी घटना से लोगों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, इसी कारण ऐसे मामले सरकार और एजेंसियों के लिए प्राथमिकता बन जाते हैं।”
जम्मू-कश्मीर में शुरुआती गिरफ्तारी और संभावित कड़ियाँ
इस मामले की शुरुआती कड़ियाँ जम्मू-कश्मीर से मिलना प्रारंभ हुईं, जहाँ सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था।
इनसे मिले सुरागों के आधार पर ही आगे हरियाणा, यूपी और दिल्ली में छापेमारी का दायरा बढ़ाया गया।
हालाँकि, एजेंसियों ने अभी तक किसी संगठन या व्यक्ति पर आधिकारिक रूप से आरोप तय नहीं किया है।
दहशत फैलाने की कोशिश — एक वैश्विक पैटर्न
विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया भर में आतंकी घटनाओं का मुख्य उद्देश्य
दहशत फैलाना
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाना
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश देना
रहा है।
दिल्ली की घटना को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
जांच जारी, एजेंसियों का कहना—जल्द सामने आएगी पूरी तस्वीर
सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि
कई डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच जारी है
सर्वर-आधारित चैट्स की रिकवरी की कोशिशें चल रही हैं
घटनास्थल से प्राप्त केमिकल और मटेरियल की रिपोर्ट आना बाकी है
अधिकारियों के अनुसार, “घटना की साजिश बहुस्तरीय हो सकती है, इसलिए जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा।”
निष्कर्ष
दिल्ली ब्लास्ट मामले में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और एजेंसियों को कई नए तकनीकी, डिजिटल और फॉरेंसिक सुराग मिल रहे हैं।
हालाँकि अभी तक किसी संगठन या व्यक्ति की भूमिका पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन यह साफ है कि जांच व्यापक पैमाने पर चल रही है और आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
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