भारत ( INDIA )में बढ़ते ‘अनावश्यक स्टेंट ऑपरेशन’ के आरोप: डर का फायदा उठाने का गंभीर दावा, मरीजों में बढ़ी चिंता
देश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है। हाल के महीनों में कई मरीजों ने दावा किया है कि उन्हें बिना आवश्यकता के हृदय के स्टेंट लगाने या महंगे ऑपरेशन करवाने की सलाह दी गई। ये आरोप केवल छोटे शहरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और कई बड़े राज्यों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं।
इस बीच गुजरात में सामने आया एक मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां कथित रूप से INDIAN DOCTORS ARE 105 ऐसे लोगों को स्टेंट लगाने की सलाह दी गई, जिनकी रिपोर्ट बाद में बिल्कुल सामान्य पाई गई। आरोप है कि इस मामले में करीब 800 ऑपरेशन को लेकर 6 करोड़ रुपये से अधिक का बिल बनाया गया था। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की जांच अभी जारी है, लेकिन इस घटना ने उपचार प्रणाली पर जनता के भरोसे को हिला दिया है।
INDIAN DOCTOR “थोड़ा दर्द हुआ नहीं कि स्टेंट की बात”—मरीजों ने साझा किए अनुभव
देशभर में कई मरीजों ने बताया कि उन्हें मामूली सीने के दर्द, गैस, मांसपेशियों के खिंचाव या BP में बदलाव के कारण तुरंत ऑपरेशन की धमकी दी गई।
एक व्यक्ति ने बताया:
“डॉक्टर
बोले कि तुरंत स्टेंट न लगाया तो जान को खतरा है। दूसरी जगह जांच करवाई तो कुछ भी नहीं था। बस डर दिखाकर ऑपरेशन करवाने का दबाव बनाया जा रहा था।”
इसी तरह एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि एक नामी डॉक्टर ने हल्की सी बेचैनी को गंभीर बता दिया और कहा कि “अभी ऑपरेशन नहीं किया तो दिल कभी भी बंद हो सकता है।” बाद में दूसरे डॉक्टर की राय लेने पर पता चला कि समस्या सिर्फ गैस और तनाव की थी।
मरीजों के इन अनुभवों ने सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या स्वास्थ्य सेवा जरूरत से ज्यादा ‘व्यावसायिक’ हो चुकी है?
कमाई का लक्ष्य? मेडिकल प्रतिनिधियों के रोल पर भी सवाल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और फार्मा इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के अनुसार कुछ अस्पतालों में महंगे स्टेंट, टेस्ट और सर्जरी के लिए टारगेट सिस्टम लागू होने की बात कई बार सामने आई है।
यानी जितना महंगा स्टेंट लगाया जाए, उतना अधिक फायदा मरीज से बिल के रूप में वसूल किया जा सकता है।
कई मेडिकल प्रतिनिधियों ने यह भी स्वीकार किया है कि:
कंपनियाँ डॉक्टरों को महंगे स्टेंट प्रमोट करने के लिए प्रोत्साहन देती हैं
विदेशी यात्राएँ या रिवार्ड्स भी ऑफर किए जाते हैं
मरीजों को डराकर ‘इमरजेंसी ऑपरेशन’ दिखाना एक आम तरीका बन गया है
हालाँकि चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ कहते हैं कि यह पूरी कम्युनिटी पर आरोप नहीं है। देश के हजारों डॉक्टर अब भी ईमानदारी से मरीजों का इलाज करते हैं और कई बार अपने पैसे से भी मदद करते हैं।
AIIMS विशेषज्ञों की चेतावनी: हर सीने का दर्द हार्ट अटैक नहीं
कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि:
हर सीने में दर्द दिल का संकेत नहीं होता
गैस, चिंता, थकान, मांसपेशियों में खिंचाव—ये भी समान दर्द पैदा कर सकते हैं
स्टेंट केवल तब लगाया जाता है जब ब्लॉकेज 70% या उससे अधिक हो
महंगे ऑपरेशन से पहले दूसरी राय (Second Opinion) जरूरी है
विशेषज्ञ कहते हैं कि अनावश्यक ऑपरेशन रोकने के लिए:
अस्पतालों में पारदर्शिता बढ़े
स्टेंट और ऑपरेशन के मामलों की स्वतंत्र जांच हो
डॉक्टर-कंपनी टारगेट सिस्टम पर प्रतिबंध लगे
मरीज को अपनी रिपोर्ट की इमेज सहित पूरी कॉपी दी जाए
अमेरिका में भी मेडिकल नियमों पर सख्ती की मांग
अमेरिका में भी H-1B वीज़ा और मेडिकल एथिक्स पर चर्चाएं तेज़ हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि आने वाले वर्षों में मेडिकल सेक्टर में विदेशी डॉक्टरों की संख्या नियंत्रित करने पर विचार हो रहा है। इससे भारतीय डॉक्टरों में भी चिंता बढ़ी है।
हालाँकि आधिकारिक नीति अभी अंतिम रूप में नहीं है, लेकिन यह चर्चा बताती है कि मेडिकल सेक्टर में पारदर्शिता और ईमानदारी पर वैश्विक फोकस बढ़ रहा है।
सभी डॉक्टर दोषी नहीं—सिस्टम में सुधार की ज़रूरत
यह भी उतना ही सच है कि भारत में बड़ी संख्या में ऐसे डॉक्टर हैं जो:
गरीब मरीजों की मुफ्त मदद करते हैं
बिना बिल बढ़ाए इलाज का सही रास्ता बताते हैं
कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता के साथ काम करते हैं
समस्या पूरी कम्युनिटी नहीं—बल्कि वह हिस्सा है जिसने चिकित्सा को ‘सेवा’ से अधिक ‘व्यापार’ बना दिया।
मरीज क्या करें? (Important for Public Awareness)
✔ हमेशा दो डॉक्टरों की राय लें
✔ angiography की original images देखें
✔ अस्पताल का रेट-कार्ड मांगें
✔ डर के आधार पर निर्णय न लें—रिपोर्ट्स देखें
✔ सीने में हल्का दर्द = हमेशा हार्ट अटैक नहीं
निष्कर्ष
स्वास्थ्य सेवा किसी भी देश की रीढ़ होती है। भारत में अनावश्यक स्टेंट ऑपरेशन के हालिया आरोपों ने यह साफ कर दिया है कि सिस्टम में सुधार, नियमों की सख्ती और पारदर्शिता समय की मांग है।
मरीज, डॉक्टर, सरकार और अस्पताल—सभी मिलकर ही स्वास्थ्य व्यवस्था को विश्वास योग्य और सुरक्षित बना सकते हैं।
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