रूस का Su-57 vs अमेरिका का F-35: सोशल मीडिया पर उड़ रही फेक खबरों का सच, अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा Su-57 India Deal
Su-57 India Deal-भारतीय एयर शो में इस बार जिस तरह लड़ाकू विमानों की गर्जना ने लोगों का दिल जीता, उसी बीच रूस के अत्याधुनिक Su-57 और स्काईलाइन में उड़ते विभिन्न फाइटर जेट्स ने सबका ध्यान खींचा। सोशल मीडिया पर भी लगातार चर्चाएँ चल रही हैं कि रूस भारत को Su-57 और नए जनरेशन का Su-75 ट्रांसफर करने की तैयारी में है।
लेकिन असली चर्चाएँ तब शुरू हुईं जब अमेरिका की एक बड़ी रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा हलकों में हलचल मचा दी।
U.S. CIA से जुड़ी अमेरिकी रिपोर्ट में दावा – राफेल को बदनाम करने की चीन की कोशिशें बेनकाब
अमेरिका की U.S.–China Economic and Security Review Commission ने कांग्रेस में एक रिपोर्ट सबमिट की है। इसमें बेहद चौंकाने वाला दावा किया गया:
Su-57 India Deal -चीन ने “ऑपरेशन सिंदूर” के नाम से राफेल को बदनाम करने की कोशिश की।
चीन ने राफेल को बदनाम क्यों किया?
रिपोर्ट के अनुसार—
चीन ने सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें फैलाईं
राफेल जेट के गिरने के फेक वीडियो और AI-जनरेटेड फुटेज पोस्ट किए
बड़ी संख्या में फेक IDs बनाकर गलत सूचनाएँ ट्रेंड कराईं
इसका मकसद था फ्रांस के राफेल को खराब दिखाकर अपने F-35 विकल्प को प्रमोट करना
यह रिपोर्ट न तो भारत की ओर से है और न भारत का इसमें कोई रोल है।
यह पूरी जांच अमेरिका की अपनी खुफिया एजेंसियों ने की है।
अमेरिका ने ही क्यों उजागर किया यह सच?
समयानुसार, यह सवाल उठना लाजमी है कि अमेरिका जिसने कभी राफेल पर तमाम सवाल उठाए, वही आज चीन की गलतियों को उजागर क्यों कर रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है:
अमेरिका खुद अब मानता है कि राफेल ग्लोबल मार्केट में मजबूत साबित हो चुका है
यूक्रेन, अन्य यूरोपीय देशों द्वारा इसकी डिमांड तेजी से बढ़ी है
F-35 के मुकाबले कई देशों को राफेल ज्यादा विश्वसनीय मिल रहा है
इसलिए सच छिपाना अमेरिका के हित में नहीं रहा
जनता में गलतफहमी फैलाने से पहले ही सच बताना अमेरिका के लिए मजबूरी बन गया।
रूस के Su-57 और Su-75 को लेकर उत्साह अपनी जगह है, लेकिन अमेरिकी रिपोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण बात साबित कर दी:
आज का युद्ध सिर्फ आसमान में नहीं, सोशल मीडिया और सूचना युद्ध में भी लड़ा जा रहा है।
Su-57 India Deal भारत किस दिशा में जाएगा—Su-57 या F-35?
Why India may choose Su-57 over F-35
भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञों की राय साफ है:
➡️ Su-57 भारत के लिए बेहतर विकल्प क्यों माना जा रहा है?
रूस टेक्नोलॉजी साझा करने को तैयार है
कोई राजनीतिक प्रतिबंध नहीं
भारत अपने हिसाब से मॉडिफाई कर सकता है
ऑपरेशनल लिमिटेशन न्यूनतम
इसके मुकाबले—
❌ F-35 के साथ कई सीमाएँ होंगी
संचालन पर अमेरिकी प्रतिबंध
पाकिस्तान या अन्य देशों के संदर्भ में उपयोग पर पाबंदी
संवेदनशील तकनीक साझा न करने की नीति
क्लाउड-आधारित लॉकिंग/कंट्रोल सिस्टम
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि “अगर भारत को स्वतंत्र ऑपरेशनल क्षमता चाहिए, तो रूस के विकल्प ज्यादा व्यावहारिक हैं।”
तीनों ही फाइटर जेट दुनिया की सैन्य शक्ति का भविष्य तय कर रहे हैं।
भारत के सामने 3 बड़े विकल्प खड़े हैं:India Defence News Today
💠 Rafale – विश्वसनीय, बैटल-प्रूव्ड, बिना रिस्ट्रिक्शन
💠 F-35 – एडवांस्ड लेकिन भारी अमेरिकी कंट्रोल
💠 Su-57 / Su-75 – भारत को तकनीक और स्वामित्व की आज़ादी
इस बीच रूस अपने Su-57 और Su-75 के साथ भारत को बड़ा डिफेंस पार्टनर बनाने की कोशिश में है।
भारत को अब तय करना है—
बिना शर्त टेक्नोलॉजी
याशर्तों और रिस्ट्रिक्शन वाला फाइटर जेट?
आने वाला फैसला भारत की वायु शक्ति की दिशा तय करेगा।
भारत को ऐसे जेट चाहिए जो भारत के नियमों पर काम करें, न कि बाहरी दबाव पर।
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