भारत-अमेरिका ट्रेड डील फ्रेमवर्क: 500 अरब डॉलर के बाजार के खुले द्वार, किसानों से लेकर उद्योग तक असर-2026

भारत-अमेरिका ट्रेड डील

भारत-अमेरिका ट्रेड डील फ्रेमवर्क: 500 अरब डॉलर के बाजार के खुले द्वार, किसानों से लेकर उद्योग तक असर

भारत-अमेरिका ट्रेड डील -भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील फ्रेमवर्क को लेकर दोनों देशों से बड़े बयान सामने आए हैं। अमेरिका की ओर से इसे भारत के विशाल और संभावनाओं से भरे बाजार तक पहुंच का बड़ा मौका बताया गया है, वहीं भारत सरकार ने साफ किया है कि इस समझौते में किसानों, डेयरी सेक्टर और संवेदनशील कृषि उत्पादों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील-अमेरिका के लिए खुला 500 अरब डॉलर का बाजार

अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि की ओर से कहा गया है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इस ट्रेड फ्रेमवर्क से अमेरिका के लिए लगभग 500 अरब डॉलर के बाजार में अवसर खुलते नजर आ रहे हैं। इससे अमेरिकी उत्पादों, उद्यमियों, कर्मचारियों और किसानों को भी फायदा मिलने की उम्मीद जताई गई है।
वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच संपर्क और रणनीतिक रिश्ते और ज्यादा मजबूत होने की बात भी कही गई है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील-रिश्तों में नई मजबूती

इस फ्रेमवर्क को भारत–अमेरिका संबंधों में एक नई आर्थिक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के उद्यमियों को इससे लाभ मिलने की बात कही गई है और ट्रेड डील को भविष्य के लिए एक मजबूत आधार बताया गया है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील-कांग्रेस ने उठाए सवाल

हालांकि इस ट्रेड डील फ्रेमवर्क पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि भारत कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटा सकता है, जिससे अमेरिकी किसानों को फायदा और भारतीय किसानों को नुकसान होने की आशंका है।
कांग्रेस का आरोप है कि अगले पांच वर्षों में आयात तीन गुना तक बढ़ सकता है और आईटी व सर्विस इंडस्ट्री को लेकर सरकार की ओर से स्पष्टता नहीं है।
इसके साथ ही H-1B वीज़ा और सर्विस सेक्टर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

सरकार का जवाब: किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ कहा कि

  • डेयरी उत्पादों पर अमेरिका से कोई आयात नहीं होगा

  • किसानों और सब्जी उत्पादकों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है

सरकार ने उन कृषि उत्पादों की सूची भी जारी की है, जिन्हें पूरी तरह संरक्षित रखा गया है।

संरक्षित कृषि उत्पादों की सूची

सरकार के अनुसार जिन उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है, उनमें शामिल हैं:

  • आम, स्ट्रॉबेरी

  • सूखा आलूबुखारा, इमली, सिंघाड़ा गिरी

  • प्याज, आलू, मटर, फलियां

  • मशरूम, तोरी, कुंदरू

  • शकरकंद, काबुली चना

  • शिमला मिर्च, खीरा, लहसुन, कद्दू, भिंडी

  • खट्टे फल (सिट्रस फ्रूट्स)

इन सभी को भारतीय कृषि हितों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित रखा गया है।

डेयरी सेक्टर पूरी तरह बाहर- भारत-अमेरिका ट्रेड डील

सरकार ने दो टूक कहा है कि डेयरी उत्पादों को लेकर अमेरिका से कोई समझौता नहीं हुआ है और इस सेक्टर में कोई आयात नहीं होने दिया जाएगा।

POK को लेकर अमेरिका की तस्वीर पर बड़ा संकेत

इस बीच अमेरिका की ओर से जारी एक आधिकारिक तस्वीर ने भी ध्यान खींचा है। तस्वीर में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) और गिलगित-बाल्टिस्तान को भारत का अभिन्न अंग दिखाया गया है। इसे भारत के पक्ष में एक बड़े कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

भारत–अमेरिका ट्रेड डील फ्रेमवर्क को लेकर जहां एक ओर अमेरिका के लिए बड़े आर्थिक अवसर सामने आ रहे हैं, वहीं भारत सरकार का दावा है कि किसानों, डेयरी सेक्टर और संवेदनशील उत्पादों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।
अब आने वाले समय में इस फ्रेमवर्क के विस्तृत प्रावधानों पर सबकी नजर टिकी रहेगी।india map on trade deal

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